Wednesday, April 28, 2010

105 वर्षीय महिला ने कॉलेज में की पढ़ाई

Florence-Walner
पोर्ट्समाउथ (अमरीका). पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। इस बात का उदाहरण वर्जीनिया के शहर पोर्ट्समाउथ की 105 वर्षीय महिला ने पिछले दिनों कॉलेज जाने का अपना सपना पूरा करके दिया। फ्लोरैंस वालनर ने वर्जीनिया बीच के बैथ शोलोम संस्था के एक कार्यक्रम के तहत कॉलेज में कक्षाएं लगाईं।

यह संस्था स्थानीय निवासियों की इच्छाएं पूरी करती है। फ्लौरैंस ने कक्षा लगाने के अनुभव बारे कहा, यह बहुत ही खूबसूरत दिन था। वहां वक्त बिताकर मुझे बहुत अच्छा लगा कॉलेज के अध्यक्ष बिली ग्रीन ने कैंपस में फ्लोरैंस का स्वागत किया और उन्हें बाकी छात्रों से मिलवाया। उन्होंने उनसे कहा, मैं चाहता हूं कि आप सभी छात्रों से मिलें और अपने अनुभव बांटें। मुझे पूरा भरोसा है कि आप उन्हें कुछ न कुछ ऐसा बताएंगी जिनसे उनका जीवन और बेहतर होगा।

इंसानों की तरह गम में डूबते हैं चिंपैंजी

chimp
वैज्ञानिक हमेशा यह मानते रहे थे कि अपने प्रिय के खोने पर शोक में डूब जाना और आखिरी रस्म निभाना मनुष्य को जीव जंतुओं के संसार से अलग पहचान देता है। लेकिन अब एक नए अध्ययन ने इस धारणा को खत्म कर दिया है। अध्ययन के मुताबिक अपने प्रियजनों के आखिरी समय में चिंपैंजी उनके करीब रहते हैं और उनकी मृत्यु के समय उनके चेहरे पर वैसी गमगीन भावनाएं रहती हैं।

जैसी मनुष्यों में देखी जाती हैं। द टैलीग्राफ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक एक बुजुर्ग मादा चिंपैंजी के गिर जाने पर उसके परिवार वाले न केवल घंटों उसके करीब रहे बल्कि वे इस कदर दुखी थे कि उसकी मौत के बाद काफी समय तक वे वहां से नहीं हटे।


Tuesday, April 27, 2010

70 साल से बिना कुछ खाए-पिए जिंदा

prahaldji jani
भारत में व्रत और उपवास की लंबी परंपरा रही है हालांकि शायद ही कोई हो जो वर्षो तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए जीवित रहा हो। लेकिन गुजरात में एक ऐसा शख्स भी है जिसके बारे में दावा किया जाता है कि वह पिछले 70 वर्षो से बिना कुछ खाए-पिए न केवल जीवित है बल्कि बढ़ती उम्र के असर से भी अछूता है।

राज्य के बनासकांठा जिले में स्थित एक मंदिर की गुफा में रहने वाले 81 वर्षीय प्रह्लादभाई जानी उर्फ माताजी ने गत 70 वर्षो से अन्न-जल का पूरी तरह त्याग कर दिया है और यह बात स्वास्थ्य विशेषज्ञों को आश्चर्य में डाले हुए है। अब डिफेंस इन्स्टीट्यूट आफ फिजियोलजी एंड अलायड साइसेंस (डीआईपीएएस) के विशेषज्ञ स्थानीय स्टर्लिंग अस्पताल के डाक्टरों के साथ मिलकर प्रह्लादभाई की जांच करके यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि किस तरह वह बिना कुछ खाए और मल-मूत्न का त्याग किए स्वस्थ्य जीवन जी रहे हैं।

स्टर्लिंग अस्पताल के न्यूरोलाजिस्ट डा. सुधीर शाह और डीआईपीएएस की डा. इला वजगान ने बताया कि 22 अप्रैल से शुरु हुआ यह शोध सात मई तक चलेगा। डा. शाह ने कहा कि देश में लंबे समय तक उपवास रखने की परंपरा देखी जाती है लेकिन तब भोजन या पानी की कुछ मात्ना ले ली जाती है। लेकिन प्रह्लादभाई का मामला इसलिए अलग है कि उन्होंने भोजन और पानी को पूरी तरह छोड़ दिया है।

प्रह्लादभाई ने डाक्टरों को बताया है कि उनके पास विशेष कुंडलिनी शक्ति है जिसके कारण वह इतने वर्ष बिना खाए-पिए रह सके। डा. वजगान ने एक अध्ययन का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि हम इसके पीछे का रहस्य पता लगा सके तो प्राकृतिक आपदा में फंसे लोगों, विपरीत परिस्थितयों में पानी और भोजन की कमी से जूझते सैनिकों के लिए प्रभावी रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि प्रह्लादभाई के शरीर का अध्ययन करके पता लगाया जाएगा कि वह किस तरह अन्य लोगों से अलग है और अगर ऐसा हुआ तो इससे सैनिकों और अंतरिक्षयात्नियों को मदद मिलेगी। डाक्टरों ने बताया कि 81 वर्ष की आयु में भी प्रह्लादभाई का मस्तिष्क किसी 25 वर्षीय युवक के समान काम कर रहा है। उन पर उम्र का कोई असर नहीं दिखता। यहां तक कि आज भी वह सात मंजिला इमारत पर चढ़ सकते हैं और वह भी बिना किसी थकान के।

खेत में दिखा जीसस का चेहरा

google
गूगल की मानचित्र (मैप) सेवा गूगल अर्थ पर गॉड के पुत्र जीसस का चेहरा दिखाई दिया है। सेटेलाइट से लिए गए चित्र में ईस्टर्न हंगरी के एक खेत के बीचोंबीच जीसस का चेहरा दिखाई दिया। किसी जिज्ञासू इंटरनेट यूजर ने गूगल मैप्स पर हंगरी के खेतों को देखते समय इस पर ध्यान दिया। जिसमें एक खेत को गूगल मैप इमेज में देखते समय जीसस की यह तस्वीर दिखाई पड़ी। पिछले माह भी एक कुकिंग पेन पर जीसस की तस्वीर दिखाई दी थी।