Thursday, July 29, 2010

बाप रे! इतना छोटा आदमी

सिर्फ दो फिट और 6 इंच ऊंचाई वाला चीन का 40 वर्षीय व्यक्ति दुनिया का सबसे नाटा व्यक्ति होने का दावा किया है। इसके पहले दुनिया में सबसे नाटे व्यक्ति का कीर्तिमान चीन के ही पिंगपिंग के नाम था। पिंगपिंग के निधन के बाद अब होंग कैक्यू ने सबसे नाटे व्यक्ति होने का दावा किया है।

40 वर्षीय होंग का वजन सिर्फ १२ किलोग्राम है। होंग का जन्म फरवरी 1970 में हुआ था। होंग की मां ने बताया कि होंग मेरा दूसरा और एकमात्र बेटा है। जबकि सबसे बड़ी बात यह है कि होंग के अन्य परिवार वालों की लंबाई सामान्य है।

होंग ने कहा कि मैं जब छोटा था तब मेरी मां मुझे गोद में उठाए रहती थी लेकिन अब देखो जब मैं 40 वर्ष का हो गया हूं तब भी अपनी मां के ही गोद में रहता हूं। मेरे सभी दोस्त आज मस्त शरीर वाले हैं लेकिन भगवान ने मेरी लंबाई बढ़ने ही नहीं दी। उसने कहा कि आज भी ज्यादातर लोग मुझे बच्च ही समझ बैठते हैं। ४क् वर्षीय होंग मौजूदा समय में चीन के सुचियान क्षेत्र में अपनी मां के साथ रहते हैं।

जानें शिव व सावन के बारे में

सावन मास में शिव आराधना का विशेष फल मिलता है। इस संबंध में धर्म शास्त्रों में भी कई उल्लेख मिलते हैं। इस महीने में भक्त अलग-अलग माध्यमों से शिव भक्ति में डूब जाते हैं। सावन में प्रकृति की छटा भी देखते ही बनती है। रिमझिम बारिश, झूले और इनके साथ ही शिव की भक्ति, सावन के महीने को पूरी तरह धर्ममय बना देती है।
अपने पाठकों को शिव तथा सावन से संबंधित रोचक जानकारियां देने के उद्देश्य से हमने विशेष उत्सव पेज तैयार किया है, जिसमें आप पाएंगे- शिव से जुड़े तांत्रिक उपाय, ज्योतिष निदान, कथाएं, रोचक बातें, प्रमुख मंदिरों की जानकारी, विभिन्न अवतार, कावड़ यात्रा की जानकारी, नित्य पूजा करने की विधि, पूजन मंत्र, सावन का धार्मिक तथा मनोवैज्ञानिक पक्ष आदि।
शिव तथा सावन से जुड़ी यह सामग्री आपके जीवन में भक्ति, ऊर्जा तथा उत्साह का संचार करेंगी। यह सामग्री आप पाएंगे सिर्फ उत्सव पेज पर।


वैवाहिक सुख बढ़ाता है - संभोग व्रत

हिन्दू संस्कृति और धर्म ग्रंथों में चार पुरुषार्थ बताए गए हैं - धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। मानव के जन्म से लेकर मृत्यु तक इन पुरुषाथों को पाने के लिए अनेक संस्कार और धार्मिक व्यवस्थाएं नियत की गई है। इन पुरुषार्थों में काम का महत्व वैवाहिक संस्कार द्वारा गृहस्थ जीवन में बताया गया है। लेकिन वैवाहिक जीवन में कोई व्यक्ति भोगी या विलासी होकर जीवन की अन्य जिम्मेदारियों से दूर न हो जाए। इसलिए प्राचीन ऋषि-मुनियों ने ऐसे व्रत का पालन करने का विधान बनाया, जिससे व्यक्ति का वैवाहिक जीवन संयमित, सुखी और जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए पूरा हो। यह व्रत है - संभोग व्रत।

इस व्रत का पालन हिन्दू पंचांग के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा यानि एकम और पंचमी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में मुख्य रुप से भगवान सूर्यदेव की पूजा की जाती है। जो पंचदेवों में शामिल है। सूर्यदेव निरोग रखने वाले और आत्मज्ञान देने वाले देव हैं।

प्रात: स्नान कर पूरी पवित्रता के साथ सूर्य की प्रतिमा का गंध, फूल, अक्षत सहित १६ तरीकों से पूजन और उपासना की जाती है। दिन में एक बार बिना नमक का भोजन करें।

रात्रि में पति या पत्नी के साथ शयन करने पर भी ब्रह्मचर्य का पालन करें। शारीरिक संबंध या अन्य भोग क्रियाओं से दूर रहें।

इस व्रत के पालन से व्यक्ति ऊर्जावान, स्वस्थ, सबल रहता है और लंबे समय तक वैवाहिक सुखों की प्राप्ति कर धार्मिक दृष्टि से पुण्य का भागी भी बनता है।

मर्यादा सीखें रामायण से

रामायण में ऐसे कई गूढ़ रहस्य छिपे हैं जो वर्तमान समय में हमें जीने की सही राह दिखाते हैं। रामायण में मर्यादाओं के पालन पर विशेष जोर दिया गया है। रामायण में ऐसे कई प्रसंग आते हैं जहां भगवान श्रीराम ने मर्यादाओं के पालन के लिए त्याग कर आदर्श उदाहरण पेश किया। श्रीराम ने मर्यादा के पालन के लिए 14 साल का वनवास भी सहज रूप से स्वीकार कर लिया। इसीलिए उन्हें मर्यादापुरुषोत्तम कहा गया।
रामायण में ऐसे भी कई प्रसंग आते हैं जहां मर्यादा का पालन न करने पर पराक्रमी व बलशाली को भी मृत्यु का वरण करना पड़ा। जब भगवान राम ने किष्किंधा के राजा बालि का वध किया तो उसने भगवान से प्रश्न पूछा-
मैं बेरी सुग्रीव प्यारा
कारण कवन नाथ मोहि मारा,
प्रति उत्तर में जो बात राम ने कही वह मर्यादा के प्रति समर्पण को दर्शाती है-अनुज वधू, भग्नी, सुत नारी,सुन सठ ऐ कन्या सम चारीअर्थात अनुज की पत्नी, छोटी बहन तथा पुत्र की पत्नी। यह सभी पुत्री के समान होती है। तुमने अपने अनुज सुग्रीव की पत्नी को बलात अपने कब्जे में रखा इसीलिए तुम मृत्युदंड के अधिकारी हो।
ऐसे ही मानवीय संबंधों को मर्यादाओं में बांधा गया है। इस प्रकार मर्यादाएं व्यक्ति के मन पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालती है। वर्तमान समय में जहां पाश्चात्य सभ्यता हमारे बीच घर करती जा रही हैं वहीं रामायण एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो हमें मर्यादाओं की शिक्षा दे रहा है।