Sunday, July 25, 2010

सेक्स से बढ़कर है फेसबुक

स्कॉटलैंड में लगभग 50 फीसदी लोग करोड़पति बनने के लिए एक साल तक सेक्स का त्याग कर सकते हैं। इसके मुकाबले सिर्फ 33 फीसदी लोग ही करोड़पति बनने के लिए फेसबुक को छोड़ना बेहतर समझेंगे। इसका मतलब है कि लोगों के लिए फेसबुक सेक्स से बढ़कर है। यह सर्वे एक वेबसाइट इंटरकैसिनो द्वारा कराया गया।

चार महिलाओं में से एक ने कहा कि वे करोड़पति बनने के लिए किसी भी अजनबी के साथ सो लेंगी। इनके मुकाबले 45 फीसदी पुरुष ऐसा करने को तैयार थे। कुल मिलाकर 40 फीसदी लोगों ने कहा कि यदि वे कल ही करोड़पति बन जाएं तो शैंपेन में डूबने और प्राइवेट जेट में आसमान नापने की बजाय वे अपने पुराने माहौल को बरकरार रखना चाहेंगे।

Saturday, July 24, 2010

क्‍या है एंजेलिना के जीवन का काला सच

‘एंजेलिना एन अनऑथोराइज्‍ड बॉयोग्राफी’ के मार्केट में आने से एंजेलिना बहुत आहत है। उन्‍होंने कहा है कि हर व्‍यक्ति के जीवन में बुरा वक्‍त आता है। मेरे जीवन में बुरा वक्‍त आया। लेकिन मैं अपने आप से सीखी।


ब्रैड पिट का मेरे जीवन में बहुत ज्‍यादा महत्‍व है क्‍योंकि उसने मेरे व्‍यक्तित्‍व को सबसे ज्‍यादा निखारा है। जब दो लोग साथ रहते हैं तो दोनों एक दूसरे से बहुत कुछ सीखते हैं। हमदोनों बहुत अच्‍छे पार्टनर है। मुझे यहां तक पहुंचाने में ब्रैड का बहुत बड़ा योगदाना है। मैं उसके साथ सुरक्षित महसूस करती हूं।


गौरतलब है कि एंजेलिना जोली की दाई ने एंजेलिना पर किताब लिखकर उन्‍हें चर्चा का विषय बना दी है। किताब में लिखा गया है कि एंजेलिना की मां ने बचपन में उसे छोड़ दिया था। और इसलिए एंजेलिना को टीन एज से ही ड्रग्‍स की लत लग गई थी। वह गुस्‍से में हिंसक हो जाती थी तथा कभी कभी तो वह खुद को भी घायल कर लेती थी।


एंजेलिना की मां मार्चलाइन अपने पति जॉन वोइट से अलग होने के बाद एंजेलिना को अपने जीवन से अलग कर दी थी। यह घटना 1976 की है। इसके बाद एंजेलिना की मां ने प्रोड्यूसर बिल डे के साथ रहने लगी थी। एंजेलिना की मां मार्चलाइन ने एंजेलिना को दो वर्षों तक अलग अपार्टमेंट में रखा था। अपार्टमेंट के स्‍टाफ उसकी देखभाल करते थे।

कोई भी बन सकेगा मिस्टर इंडिया

सुनने में यह सब फिल्म मिस्टर इंडिया की कहानी सा लग सकता है लेकिन सौ फीसदी सच है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कांच के अत्यंत सूक्ष्म टुकड़ों की मदद से ऐसा कपड़ा तैयार किया है जिसे किसी वस्तुओं को ढंकने के बाद वे अदृश्य हो जाती हैं।

सामान्य रूप से जब प्रकाश किसी वस्तु पर पड़ता है तो वह परावर्तित होकर व्यक्ति की आंखों पर पड़ता है जिससे हमें चीजें दिखाई देती हैं। लेकिन मिशिगन टेक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी तरकीब खोज निकाली है जिससे किसी वस्तु पर पड़ने वाला प्रकाश परावर्तित नहीं होता है बल्कि उस वस्तु के आकार के अनुसार मुड़कर अपने रास्ते पर आगे चला जाता है। हालांकि यह खोज अभी इंफ्रारेड लाइट (अवरक्त प्रकाश) तक ही सीमित है। अभी यह तकनीक प्रयोगशाला में ही सफल हो पाई है लेकिन यदि इंफ्रारेड किरणों पर मिले परिणाम दृश्य प्रकाश पर भी मिल सके तो अदृश्य होने की कल्पना साकार हो सकेगी।

कपड़ा कर देगा अदृश्य

ऐसा धातुरहित सूक्ष्म कपड़ा जो कांच के रेजोनेटर्स से बना है। रेजोनेटर वह डिवाइस या तंत्र होता है जिसके अंतर्गत पदार्थ में कंपन होता रहता है। इसे उस पदार्थ की अनुनाद प्रवृत्ति भी कहते हैं। कंप्यूटर सिमुलेशंस (कंप्यूटर द्वारा किए गए प्रयोग) में यह इंफ्रारेड प्रकाश को मोड़ कर वस्तु को गायब कर देता है। गौरतलब है कि इस प्रायोगिक कपड़े का आकार बहुत ही छोटा है। इसका आकार एक मीटर के दस लाखवें भाग के बराबर है।

इलीना द्वारा बनाया गया विशेष पदार्थ प्रकृति में मिलने वाले पदार्थो की तरह नहीं है। इसमें वे गुण हैं जो सामान्य रूप से प्रकृति में नहीं मिलते। इस कपड़े को बनाने के लिए संकेंद्रित कांच के रेजोनेटर्स को बेलन के आकार में व्यवस्थित किया गया है। न्यू साइंटिस्ट मैगजीन ने पिछले साल अनुमान लगाया था कि अगले 30 सालों में अदृश्य करने वाला कपड़ा रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाएगा।


कैसे अदृश्य होंगी चीजें

वृत्त की आराएं (स्पोक्स) एक चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण करेंगी जो वस्तु पर पड़ने वाले प्रकाश की किरण को मोड़ देगा। इस धातुरहित कपड़े को बनाने के लिए सामान्य गुणधर्म के पदार्थ के अणु-परमाणु नहीं बल्कि अत्यंत महीन रेजोनेटर्स का प्रयोग किया गया है। रेजोनेटर्स को पदार्थ विज्ञान और विद्युत इंजीनियरिंग के बीच की कड़ी कहा जा सकता है।

'यहां दी जाती थी इंसानों की बलि'

पेरू के पुरातत्वविदों ने एक ऐसी जगह की खोज की है जहां छठवीं शताब्दी में इंसानों की बलि दी जाती थी। इस जगह का नाम लैम्बेक है जो पेरू के उत्तरी इलाक़े में स्थित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पुरातत्वविदों ने यहां एक 60 मीटर लंबा हॉल खोजा है जिसकी दीवारें कई रंगों में रंगी गई थीं।

पुरातत्वविदों के अनुसार बीते समय में इस हॉल को काफ़ी ख़ूबसूरती से सजाया जाता रहा होगा। पुरातत्वविदों की टीम का नेतृत्व करने वाले कार्लोस वेस्टर ला टोरे का कहना है कि इस हाल का निर्माण मोचे लोगों ने किया था। गौरतलब है कि मोचे लोगों की सभ्यता एक कृषि आधारित विकसित सभ्यता थी जो 100 वर्ष ईसा पूर्व से लेकर 800 ईस्वी के बीच पनपी थी इसका अस्तित्व पेरू के 'इंका' साम्राज्य के पहले था।


पुरात्वविदों का मानना है यहां युद्ध बंदियों की बलि चढ़ाई जाती थी। इस जगह की ली गई तस्वीर में फर्श पर कम से कम छह मानव कंकाल दिखाई पड़ते हैं।वेस्टर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "समारोह के लिए उपयोग में लाए जाने वाले इस हॉल में मौजूद चीजों से मोचे समुदाय के अभिजात्य लोगों की उपस्थिति और मानव बलि के प्रमाण मिलते हैं"


गौरतलब है कि पिछले 25 सालों में पुरातत्वविदों को पेरू में मोचे समुदाय के समृद्ध लोगों और शासकों की ढेरों क़ब्र और कलाकृतियां मिली हैं।