Wednesday, April 14, 2010

सात साल उम्र बढ़ा सकती है एक मुस्कान

लंदन। एक मुस्कान का कोई मूल्य नहीं होता लेकिन यह आपकी उम्र के सात वर्ष बढ़ा सकती है। ‘डेली मेल’ के अनुसार हमारी मुस्कान जितनी चौड़ी होगी और मुस्कराते समय आंखों के इर्द-गिर्द जितनी झुर्रियां बनेंगी उतनी ही लंबी हमारी जिंदगी होगी। वायने स्टेट यूनिवर्सिटी, मिशिगन के खोजकर्ताओं ने 1952 में छपे बेसबॉल रजिस्टर में प्रकाशित मेजर लीग बेसबॉल के 184 खिलाड़ियों की तस्वीरों से यह निष्कर्ष निकाला है।

उस रजिस्टर में उन खिलाड़ियों की जन्मतिथि, वजन, वैवाहिक स्थिति, करियर सहित उनके पूरे जीवन के बारे में सारी जानकारी दी गई थी। खोजकर्ताओं ने हर खिलाड़ी को उनकी अलग-अलग तरह की मुस्कान (कोई मुस्कान नहीं, हल्की सी मुस्कान जिसमें मुंह के कुछ मसल्स ही क्रिया करते हैं और पूरी मुस्कान जिसमें दांत दिखते हैं तथा गाल और आंखों के आसपास के मसल्स काम करते हैं) के आधार पर अंक दिए हैं। खोजकर्ताओं ने इन तस्वीरों की हरेक खिलाड़ी के जीवन से तुलना की। इस खोज में पाया गया कि जो खिलाड़ी बिल्कुल नहीं मस्कुराते थे उनकी औसत उम्र 72.9 थी।

वहीं छोटी मुस्कान वाले खिलाड़ियों की औसत उम्र 75 वर्ष थी। इनके अलावा जो खिलाड़ी खुल कर मुस्कान बिखेरते थे उनकी औसत आयु 79.9 रही जोकि न मुस्कुराने वालों की तुलना में सात वर्ष ज्यादा थी। अध्ययन से यह भी पता चला कि झूठी मुस्कान भी सेहत को वैसा फायदा नहीं पहुंचा सकी जो कि असली मुस्कान ने पहुंचाया था।

ये आस्था है या अंधविश्वास!

धर्म और आस्था का देश माने जाने वाले भारत में आस्था के नाम पर अंधविश्वास करने वालों की कोई कमी नहीं है। कोई पापों से मुक्ति के लिए खुद को असहनीय कष्ट देता है, तो कोई अपने शरीर का कोई भाग काट कर भगवान को चढ़ा देता है। इसी प्रकार की एक घटना कोलकाता से 80 किलोमीटर दूर स्थित बाइनान गांव में देखी गई।

यहां लोगों ने लोहे की रॉड को अपनी जीभ के आर-पार किया। इन लोगों ने ऐसा भगवान शिव को खुश करने के लिए किया। आइए देखते हैं कुछ खास चित्र-














Friday, April 9, 2010

बॉलीवुड की हमशक्ल नायिकाएं

आपने फिल्मों में जुड़वां भाईयों व बहनों या फिर हमशक्ल चरित्रों को देखा होगा। हो सकता है आपने वास्तविक जीवन में कई हमशक्लों को देखा होगा लेकिन इस बार "विकास" आपके लिए लेकर आ रहा है बॉलीवुड की हमशक्ल नायिकाओं को।

इन अभिनेत्रियों का एक-दूसरे से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। लेकिन इन्हें देखकर आपको अहसास होगा कि ये तो आपस में बहनें ही हैं लेकिन वास्तविकता में ऐसा कुछ भी नहीं है। आइए देखते हैं ऐसी ही कुछ नायिकाओं को......



1. दिव्या भारती व रंभा



2. तब्बू-माही गिल



3. कैटरीना कैफ-जरीन खान

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4. ऐश्वर्या राय-स्नेहा उल्लाल

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5. परवीन बॉबी-दीपशिखा

हां संभव है गायब होना

 invisibleman_310 हम जानते हैं कि किसी भी वस्तु के दिखने के लिए प्रकाश का होना जरूरी है। इसी कारण सूर्य को आंखों का देवता भी माना जाता है। जब प्रकाश की किरणें किसी वस्तु पर पड़ती हैं तो वे परावर्तित होकर हमारी आंख की पुतलियों से टकराती हैं। आंख की पुतली से गुजरकर ये किरणें पीछे की ओर एक निश्चित दूरी पर उसका बिंब बनाती हैं। इस बिंब के साथ जो स्नायु जुड़े रहते हैं वे इसकी सूचना मस्तिष्क को देते हैं। जिससे उस वस्तु की आकृति हमें दिखाई देती है। किंतु योगिक साधना के जानकार के लिए यह क्रिया सुनिश्चित प्रणाली के तहत होती है। योगी एक ऐसी सिद्धि प्राप्त कर लेता है कि वह उपस्थित होते हुए भी किसी को दिखाई नहीं देता। योग की भाषा में इस क्षमता को अंतध्र्यान होना कहा जाता है। योगी अपनी सिद्धि के बल पर अपने शरीर का रंग ऐसा बना लेता है जिससे कि प्रकाश की किरणें परावर्तित ही नहीं होती। जिससे दूसरे लोगों की आंखों में उसका बिंब बनता ही नहीं है। इसी कारण उस योगी को कोई देख नहीं सकता। इसके अतिरिक्त योग शास्त्रों में गायब होने की एक अन्य विधि का भी उल्लेख मिलता है। सिद्ध योगी पंच तत्वों से बने अपने शरीर के अणु परमाणुओं को आकाश में बिखेर कर सूक्ष्म शरीर धारण कर लेता है। यह सुक्ष्म शरीर किसी को भी दिखाई नहीं देता। योगी सूक्ष्म शरीर से कुछ ही क्षणों में कितनी ही दूर जा सकता है। सिद्ध योगियों के पास इसी तरह की अनेक अद्भुत क्षमताएं होती हैं। ये अद्भुत सिद्धियां कोई जादु या चमत्कार नहीं है। यह सिद्धियां एक निश्चित वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत कार्य करती हैं। अष्टांग योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि ने गायब होने की इस यौगिक सिद्धि का उल्लेख अपने ग्रंथ में किया है। वे लिखते हैंकायरूपसंयमात् ..... अंतर्धानम्। (विभूति पाद सूत्र 21) यानि शरीर के रूप में संयम करने से जब उसकी ग्रहण शक्ति रोक ली जाती है। तब आंख के प्रकाश का उसके साथ संबंध होने के कारण योगी अंतर्धान हो जाता है।